साथ हूं मैं
उस ने तो मन में ही कहा था, मैं तुम्हारे साथ हूँ
मैं ने फिर भी सुन लिया था, मैं तुम्हारे साथ हूँ।
आज देखा उस को, वो किसी और के साथ था
जो कल मुझसे कह रहा था, मैं तुम्हारे साथ हूँ।
मुश्किलें रास्ता ही बदल लेती जरा सी बात पर
बस उसे ये बोलना था, मैं तुम्हारे साथ हूँ।
ज़ख़्म तो भरने लगे थे जिस्म के सारे मगर
दर्द मुझ से कह रहा था, मैं तुम्हारे साथ हूँ।
तुम ने बेशक मुझ को दुनिया से छुपाया था
आइना तो जानता था, मैं तुम्हारे साथ हूँ।
अंधेरा तो बिखरा पड़ा था ज्योति के आसपास
मन के उजाले में लिखा था, मैं तुम्हारे साथ हूँ।
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