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बेनाम रिश्ता

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रात के दो बज चुके थे। कमरे में सिर्फ एक हलकी पीली रोशनी जल रही थी। रजत अपनी बालकनी के पास खड़ा था, और उसकी नज़रें सोफे पर एक किताब सीने से लगाए सो रही मानसी पर टिकी थीं, जो उसकी दोस्त थी, हमसफर थी, और शायद उससे भी बहुत कुछ ज़्यादा।रजत के मन में अचानक एक खयाल गूंजा कि मानसी ने कभी उससे रिश्ते का कोई नाम नहीं माँगा था। उसने कभी भविष्य को लेकर कोई दबाव नहीं बनाया। उसने बस अपना समय, अपनी भावनाएं, अपनी परवाह, सब कुछ रजत पर लुटा दिया था... बिना कभी कोई हिसाब रखे। एक बार रजत ने पूछा, "तुम मेरे लिए इतना क्यों करती हो?" मानसी ने बस मुस्कुरा कर कहा, "क्योंकि तुम 'तुम' हो, और मुझे तुम्हारे अलावा कुछ नहीं चाहिए।" वह कभी नहीं कहती थी कि "मैंने तुम्हारे लिए यह किया, तो तुम भी ऐसा करो।" उसका प्यार किसी लेन-देन का मोहताज नहीं था। रजत को अपना पिछला साल याद आ गया। वह दौर जब उसका करियर बिल्कुल ढलान पर था। वह चिड़चिड़ा हो गया था, खुद से भरोसा खत्म हो रहा था। दुनिया और रिश्तेदारों की नज़रों में वह एक असफल इंसान था। लेकिन मानसी का प्यार किसी समाज के ठप्पे या शादी के सर्टिफिके...

Rishte aur Transaction

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Jaise Paytm, Navi ya Google Pay se transaction karte waqt hum pehle ₹1 bhej kar acknowledgement ka wait karte hain. Agar confirmation time par mil jaye, tabhi hum aage ₹100, ₹1000 ya kuch aur amount transfer karte hain. Bina acknowledgement ke koi bhi bada transaction nahi karta. Yeh baat sirf paise ke transaction par hi lagu nahi hoti. Zindagi ke har transaction par bhi utni hi sach hai. Emotions, care, compassion, apnapan, empathy aur love — in sab mein bhi timely acknowledgement bahut zaroori hota hai. Jab kisi ki feeling, effort ya concern ko samay par pehchaan aur response milta hai, tabhi trust banta hai aur rishton ka connection mazboot hota hai. Warna kabhi-kabhi sab kuch hote hue bhi rishton ka balance disturb ho jata hai. Rishte bhi ek tarah ka transaction hi hain—farq bas itna hai ki yahan currency paise nahi, samajh aur timely acknowledgement hoti hai.

Wo ek tanha sa pool

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पुल के नीचे बहुत पानी बह गया है कुछ गुस्से में, कुछ जल्दबाजी में, कुछ खुशी में, कुछ बुरा सा मान के लेकिन ये पुल अभी भी अंधेरे में एक छाया की तरह खड़ा है, अपने बीते पलों की यादों को तोड़ते हुए, रौंदा हुआ सा, पेड़ों के झुंड के पीछे अलग और छिपा हुआ ! क्या किसी को पता है कि.....  एक पुल बनने में इतना समय लगता है  एक पुल को पार करने में कितना समय लगता है

साथ हूं मैं

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उस ने तो मन में ही कहा था, मैं तुम्हारे साथ हूँ मैं ने फिर भी सुन लिया था, मैं तुम्हारे साथ हूँ। आज देखा उस को, वो किसी और के साथ था जो कल मुझसे कह रहा था, मैं तुम्हारे साथ हूँ। मुश्किलें रास्ता ही बदल लेती जरा सी बात पर बस उसे ये बोलना था, मैं तुम्हारे साथ हूँ। ज़ख़्म तो भरने लगे थे जिस्म के सारे मगर दर्द मुझ से कह रहा था, मैं तुम्हारे साथ हूँ। तुम ने बेशक मुझ को दुनिया से छुपाया था आइना तो जानता था, मैं तुम्हारे साथ हूँ। अंधेरा तो बिखरा पड़ा था ज्योति के आसपास  मन के उजाले में लिखा था, मैं तुम्हारे साथ हूँ।

Nahi pata...

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क्या गलत है क्या सही, क्या मेरी खता  तू है मेरे दिल में बसा, यही बस है पता। क्या सोचूं किसको सोचूं, मेरा रहा है क्या  और क्या अब मैं कहूं, नहीं कुछ पता।। किस राह से आयेगा वो, बेचैन है निगाह  दिल की धडकन को छुएगा! नहीं कुछ पता। तेरी हो गई, ए ज़माने अब ना मुझे सता  जो सोचे वो क्या सोचे, मुझे नहीं पता।। माना कि हवाएं, किनारों से रही है सता  लौ है बाक़ी ज्योति में, मुझे है ये अता  और क्या अब मैं कहूं, नहीं कुछ पता।।

इस दौर का चलन

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न अपना वक़्त आया, न मौक़ा मिला निभाने का, इस दौर के रिश्तों को, निभाना सीख नहीं पाए। जल गए हाथ, और दामन भी राख हुआ, पर ये ज्योति बुझाना, हम सीख नहीं पाए।। नए घर बने तो मगर, दूरियाँ इस कदर बढ़ गईं, इस शहर को अपना, हम बना ही नहीं पाए। वो पूछते रहे कि, आँखें क्यों नम हैं मेरी, हम भरे गले से, झूठा बहाना बना नहीं पाए।। हर बार जाते हुए, मुड़कर देखा उसको हर दफा छोड़कर जाना किसी को, हम सीख नहीं पाए।। दुनिया के चलन में नासमझ ही रह गए, मान लिया हमने, कि जीना सीख नहीं पाए  इस दौर के रिश्तों को, निभाना सीख नहीं पाए।

Letter to me

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Dear Jyoti, I hope this letter finds you in a moment of calm, even if the world around you feels heavy. There are times when words fall short, when silence stretches too long, and when emotions overflow in ways we don't always understand. But still—through it all—you’ve kept going. That says something powerful about your strength. You feel deeply. You care beyond limits. You carry others’ pain while quietly battling your own. And even when you're tired or hurting, you still find a way to smile for others. That is a rare kind of beauty. Please remember: it’s okay to feel lost sometimes. It’s okay to cry, to fall apart, to not have all the answers. You don’t have to carry everything alone. You matter. Your voice, your heart, your presence—make a difference in ways you may never fully see. The version of you that laughed freely, that didn’t beg for attention, that didn’t shrink to fit someone else’s space. Let go, not because you’re weak—but because you’re finally choo...