Nahi pata...

क्या गलत है क्या सही, क्या मेरी खता 
तू है मेरे दिल में बसा, यही बस है पता।
क्या सोचूं किसको सोचूं, मेरा रहा है क्या 
और क्या अब मैं कहूं, नहीं कुछ पता।।
किस राह से आयेगा वो, बेचैन है निगाह 
दिल की धडकन को छुएगा! नहीं कुछ पता।
तेरी हो गई, ए ज़माने अब ना मुझे सता 
जो सोचे वो क्या सोचे, मुझे नहीं पता।।
माना कि हवाएं, किनारों से रही है सता 
लौ है बाक़ी ज्योति में, मुझे है ये अता 
और क्या अब मैं कहूं, नहीं कुछ पता।।

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