Perfect प्यार

प्रिया ने मुझसे पूछा, "ऐसा क्यों है कि मैंने उसे इतना प्यार दिया, उसके बावजूद भी वो चला गया?"
मैंने कहा , "क्योंकि वो काफी नहीं है।"
"क्यों?"
मैं उसकी आँखों में नहीं देख सकती थी इसलिए मैंने अपने हाथ की ओर देखा। "क्योंकि वो अब तुमसे प्यार नहीं करता।"
ये सुन कर फिर प्रिया बहुत देर तक चुप रही. 
मैंने कोई और शब्द न सुना न बोला, और जब मैंने उसकी ओर देखने की हिम्मत जुटाई, तो मुझे चैन सा मिला, क्योंकि मैंने देखा कि वो रो नहीं रही थी।
 बल्कि वो खाली निगाहों  से सांझ के ढलते हुए संतरी आकाश को देख रही थी, शायद सैकड़ों बातें सोच रही थी और उगते हुए सितारों से हजारों सवाल पूछ रही थी। 

मैंने भी वैसा ही किया और बादलों की तरफ़ ऊपर की ओर देखा।
"क्योंकि, प्रिया हम जानते हैं, यह इस बारे में नहीं है कि हम उस इंसान से कितना प्यार करते हैं।  और हां, यह इस बारे में भी नहीं है कि जब हम उनके साथ थे तो हम कितने खुश थे या कितना परफेक्ट महसूस करते थे।"

"तो क्या प्यार हमेशा नहीं रहता !"
प्रिया के सवाल का जवाब देने की कोशिश करते हुए मैने कहा "जब दो लोग प्यार में एक दूसरे से दूर हो जाते हैं, तो वे एक तरह से दूर चलते चले जाते हैं, जैसे एक बादल दूसरे से अलग हो रहा हो। बीच में बस कुछ खाली सा होता है दोनों के बीच। और कुछ भी पहले की तरह अब उन दोनों तक नहीं पहुंचता।"

मैंने अपने अतीत की कुछ बातें याद करते हुए चुप लगा ली थी। 
आप जितना चाहें चिल्ला सकते हैं, आप उसे बता सकते हैं कि आप उससे लाखों बार प्यार करते हैं, लेकिन दूरी इतना ज्यादा है कि हवा भी आपकी आवाज उस तक नहीं पहुंचा सकती। 
"प्रिया इस बात को इस तरह से समझने की कोशिश करो।
आप दोनों एक टापू में फंसे हुए हैं। जिस वक्त आप सिर्फ आग जलाने और इशारा भेजने के लिए यहां वहां लकड़ी, कूड़ा स्क्रैप ढूंढने में लगे हुए हैं, तभी दूसरी तरफ वो अपने आप एक नई झोपड़ी बना रहे हैं और नए पेड़ लगा रहे हैं। मैं अगर सच कहूं तो मैं नहीं जानती कि, वो ये जानते हुए भी ऐसा कैसे कर सकते हैं कि उन्होंने किसी को पीछे छोड़ दिया है। वो अपनी दूसरी दुनिया बना रहा है और ये बस इतना सा ही है।"

प्रिया जैसे गहरी सोच से जागी और बोली "तो आखिर मैंने सोचना बंद कर दिया और बस अपने टापू पर ही काम करना शुरू कर दिया। हर दिन मैं अपने पौधों को पानी देती और अपने घर को सजाती, ये उम्मीद करती कि यह जगह इतनी सुंदर होगी कि अगर कोई आएगा, तो वो बस इसे पसंद करेगा और यहीं रुक जायेगा और हम दोनों किनारे से जाने कितने ही हज़ारों पल सूरज को ढलते हुए देख सकेंगे।"

एक पल के लिए सन्नाटा छा गया और प्रिया फिर फुसफुसाई, "यह बहुत सुंदर लगता है।"
प्रिया को समझाते हुए मुझे अपनी कहानी का अंजाम मिल गया था ।
मैं सितारों की ओर देखकर मुस्कुराई। "यह सुंदर ही है।"

Comments

  1. वाह, क्या ही कहे। 👌
    मैं यूं ही नही आपका फैन हूँ।🙏

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    1. धन्यवाद गौरी शंकर जी

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