क्या गलत है क्या सही, क्या मेरी खता तू है मेरे दिल में बसा, यही बस है पता। क्या सोचूं किसको सोचूं, मेरा रहा है क्या और क्या अब मैं कहूं, नहीं कुछ पता।। किस राह से आयेगा वो, बेचैन है निगाह दिल की धडकन को छुएगा! नहीं कुछ पता। तेरी हो गई, ए ज़माने अब ना मुझे सता जो सोचे वो क्या सोचे, मुझे नहीं पता।। माना कि हवाएं, किनारों से रही है सता लौ है बाक़ी ज्योति में, मुझे है ये अता और क्या अब मैं कहूं, नहीं कुछ पता।।
तुम्हारे हालात के काले बादलों के पीछे, Sun is still shining bright. भले ही ऐसा लगे कि चीज़ें कभी नहीं बदले But there is no endless night. क्योंकि एक दिन तुम्हारा भारीपन दूर हो जाएगा And you will again feel world as right. इसलिए, अपने सपनों को थामे रहो, Even if realization seems nowhere at sight एक दिन तुम्हारी दुनिया बदल जाएगी, And your heart will again know the light जिंदगी जीने का जज़्बा न खोना मेरे दोस्त Just for a little while..hold it tight
रात के दो बज चुके थे। कमरे में सिर्फ एक हलकी पीली रोशनी जल रही थी। रजत अपनी बालकनी के पास खड़ा था, और उसकी नज़रें सोफे पर एक किताब सीने से लगाए सो रही मानसी पर टिकी थीं, जो उसकी दोस्त थी, हमसफर थी, और शायद उससे भी बहुत कुछ ज़्यादा।रजत के मन में अचानक एक खयाल गूंजा कि मानसी ने कभी उससे रिश्ते का कोई नाम नहीं माँगा था। उसने कभी भविष्य को लेकर कोई दबाव नहीं बनाया। उसने बस अपना समय, अपनी भावनाएं, अपनी परवाह, सब कुछ रजत पर लुटा दिया था... बिना कभी कोई हिसाब रखे। एक बार रजत ने पूछा, "तुम मेरे लिए इतना क्यों करती हो?" मानसी ने बस मुस्कुरा कर कहा, "क्योंकि तुम 'तुम' हो, और मुझे तुम्हारे अलावा कुछ नहीं चाहिए।" वह कभी नहीं कहती थी कि "मैंने तुम्हारे लिए यह किया, तो तुम भी ऐसा करो।" उसका प्यार किसी लेन-देन का मोहताज नहीं था। रजत को अपना पिछला साल याद आ गया। वह दौर जब उसका करियर बिल्कुल ढलान पर था। वह चिड़चिड़ा हो गया था, खुद से भरोसा खत्म हो रहा था। दुनिया और रिश्तेदारों की नज़रों में वह एक असफल इंसान था। लेकिन मानसी का प्यार किसी समाज के ठप्पे या शादी के सर्टिफिके...
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